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Ek Anokhi Prem Khahani। एक अनोखी प्रेम कहानी

एक अनोखी प्रेम कहानी  

  भाग - पहला 


कुछ समझ नहीं आ रहा कि कहा से शुरू करू यह एक अनोखी प्रेम कहानी। लेकिन कहानी शुरू तो करनी ही पड़ेगी , तो 
यह बात उन दिनों की है जब प्रेम कुमार शर्मा  ने चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से BCA की पढ़ाई पूरी की थी। शर्मा जी को लगा कि हां भाई अब जाकर कहीं सांस में सांस आई। पढ़ाई की सिरदर्दी से चिंता मुक्त हो कर, किताबों के बोझ तले निकले हुये अभी कुछ दिन ही हुये थे,  कि पिताजी के साथ नोकरी करने वाले कपूर अंकल जी ने पिताजी को मुफ्त में एक सलाह दे डाली। 
                              सोमवार रात 02:00 बजे परिवार सहित सभी प्रेम को चंडीगढ़ रेल्वे स्टेशन पर गोवा संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में मुम्बई जाने के लिए चढाने रेलगाड़ी का इंतजार करने लगे। प्रेम को घुसा था तो बस कपूर अंकल जी पर, जिन्हें ने प्रेम की हंसती खेलती जिंदगी में आग लगा दी। रेलगाड़ी ठीक अपने सही समय पर प्लेटफार्म पर आ गई,  और शुरू हो गया प्रेम का मुम्बई जाने के लिए 1582 कि.मी. लम्बा सफर जो कि पुरे 25 घंटे 30 मिनट का था। माफ कीजिएगा मैं तो जल्दबाजी में बताना ही भुल गया प्रेम के घुसे  का कारण और कपूर जी ने प्रेम के पिता जी को क्या सलाह दी थीं।  दरअसल बात हुई ऐसे की कपूर जी ने बोला के देखो शर्माजी प्रेम की पढ़ाई खत्म हो गई है, बच्चा घर बैठ कर क्या करेंगा। इसे नोकरी के लिए कही भेज दो अच्छा विषय बन जाएगा। 
        फिर बाकी सभ आपके सामने है, पिता जी ने प्रेम नौकरी के लिए मुम्बई जाने को तैयार कर लिया। कहीं आप यह सब पढते पढते बोर तो नहीं हो गये तो चलिए 25 घंटे 30 मिनट का सफर छोड़ सीधा आप को ले चलते हैं,  मायानगरी मुम्बई। यहां प्रेम ठीक एक दिन और दुसरी रात के लम्बे सफर के बाद पहुंच चुका है।  रेलगाड़ी से उतरने के बाद,  टेक्सी पकड़ी और कपूर अंकल जी बताए पते पर सुबह 5 बजे पहुंच गया। दरवाजे की घंटी बजाई पर अंदर से कोई आया नहीं,  5-6 बार घंटी बजने के बाद भी कोई नहीं आया। सफर से थका प्रेम आपने सामान पर सर रख बैठ गया और एक-दौ पलों में उसकी आंख लग गई। कुछ घंटों बाद दरवाजे के खुलने की आहट सुनी तो एकदम से प्रेम खड़ा हो गया। 
प्रेम देखता है कि दरवाजे पर एक सुंदर स्वर्ग की अप्सरा जैसी लड़की खड़ी थी, प्रेम की नज़र उसके चेहरे से हट नहीं रही थी। जैसे ही प्रेम कुछ बोलने ही वाला था कि वो उसे नज़र अंदाज  कर चलीं गई। प्रेम ने अपना  सामान उठाया और अंदर की तरफ चल पड़ा। अंदर श्रीमती कुलकर्णी से आपना परिचय देने के बाद प्रेम को उसका कमरा मिल गया। थका हुआ प्रेम सीधा बिस्तर पर लेट गया, और उस अप्सरा के सपनों में खो गया। 
इस सोये हुए  प्रेम की अनोखी प्रेम कहानी कहीं अधूरी तो नहीं रह जायेगी, कोन थी वो अप्सरा जैसी लड़की,  और क्या हूआ प्रेम की प्रेम कहानी का, सब पता चलेगा इस एक अनोखी प्रेम कहानी भाग- दुसरा में जो जल्द ही प्रस्तुत किया जाए गा।  तब तक इंतजार करे इस कहानी को SHARE करे COMMENTS करे और FOLLOW करे। 
                             
                                                  --- बेपरवाह मुसाफिर ---

Comments

  1. Kahani chhoti Hain but bahut achhi hain

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  2. नमस्ते, मैं उस बारे में भी कुछ सोच रहा था, लेकिन मैंने इसे इंटरनेट पर देखने का फैसला किया, तब मुझे यह साइट मिली और मुझे यहाँ कुछ दिलचस्प वाक्य मिले, मुझे वास्तव में यह पसंद है कि आप इसे व्यक्त करें और इसे लिखने के लिए आपका शो .. मुझे यहाँ अच्छा पोस्ट मिला। मैं इसकी बातें करता हूँ। उत्तम!

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  3. अच्छा ब्लॉग लेख, मैं आपका अनुसरण करूँगा।] इस लेख को लिखने के लिए धन्यवाद, कुछ वाक्य हैं जिनसे मैं सहमत हूं और कुछ चीजें हैं जो मैं पूछना चाहता हूं, कुछ पहलुओं से, क्या आप एक लेखक हैं? क्योंकि इन लेखों में से कुछ में आपका लेखन बहुत अच्छा है और पाठकों को एक नई राय में ला सकता है।

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