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Intezaar uski rah ka| इंतजार उसकी राह का

 इंतजार....उसकी राह का

                          भाग- पहला   
सीरत ग्रेवाल, अपने नाम जैसी सुंदर और साफ दिल की मासूम से चेहरे वाली लड़की। जो हाल ही में पहले दर्जे में अपना कंप्यूटर डिप्लोमा खत्म कर, पटियाला के नंबर एक विश्वविद्यालय में बी.टेक की डिग्री के लिए नई नई दाखिल हुई हैं। आज विश्वविद्यालय में उसका दूसरा दिन है, जल्दी जल्दी में कहीं क्लास के लिए देरी न हो जाए कि चिंता में भागी जा रही थीं। तब एक दम अचानक से सीरत एक लड़के से टकरा जाती हैं और गुस्से से बड़बड़ाती हुई किताबें उठा कर वहाँ से सीधा आपनी क्लास में चली जाती है। लेकिन वह लड़का अभी तक वहीं पर सीरत के ख्यालों में डुबा हुआ खड़ा था, जी हाँ यही वो लड़का है जो इस कहानी का मुख्य नायक हैं,  नाम है विक्रम सिंह। विक्रम जैसे ही सीरत से टकराया तो सीरत को देखते ही विक्रम को पहली नजर वाला प्यार हो गया, जैसा कि हमारी हिन्दी फिल्मों में मे होता है। चारों तरफ सन्नाटा पसर गया बैकग्राउंड में गिटार बजने लगी, सीरत के लहराते हुए बाल ओर स्लो मोशन में हिलते उसके होंठ, बस जनाब तो देखते रह गए। 
सीरत के ख्यालों में खोये हुये विक्रम बाबू जैसे ही आपने क्लास के कमरे में दाखिल हुए, देखते की जो लडकी उस के ख्यालों में घुम रही है वह उसकी  ही सहपाठी है। जह देख कर जनाब के मन ही मन में लड्डू फुटने लगे,  पर सीरत ने उसकी तरफ एक बार भी नहीं देखा। लिजिए शुरू हो गया विक्रम का एक तरफा प्यार, वह हर रोज़ दिवानों की तरह सीरत को देखने के लिए कभी क्लास में कभी  पुस्तकालय ओर कभी जलपान गृह में उसके आसपास घूमता रहता। सीरत को यह तो पता चला ही गया था कि विक्रम उसे पसंद करता हैं, लेकिन सीरत इस बात को अनदेखा कर सिर्फ और सिर्फ आपनी पढाई पर ही ध्यान देती थीं। विक्रम हर रोज कुछ नया सोच कर जाता के वो कैसे अपने प्यार का इजहार करे, पर जब वो सीरत के सामने जाता तो कुछ बोल नहीं पता। जब जह बात विक्रम के मित्र आकाश को पता चली तो वह उसकी हँसी उडाने लगा, आकाश हर रोज़ विक्रम को कभी फटटु तो कभी डरपोक कह कर चिढ़ाने लगा। 
12 फरवरी ठीक वेलेंटाइन डे के दौ दिन पहले विक्रम ने हिम्मत करके सीरत को अपने दिल की बात कह डाली, सीरत एक दम से घबरा गई पर बिना डरे हुए उसने विक्रम को साफ साफ इंकार कर दिया। विक्रम ने इस इंकार की वजह पूछी तो, सीरत बोली के "विक्रम तुम एक अच्छे लडके हो, पर मैं जहाँ पढ़ाई करने आती हूँ मेरे माता-पिता को मुझसे बहुत उम्मीदें हैं, मैं उनकी उम्मीदों पर पानी नहीं फेरना चाहती कृपा तुम मेरा पीछा छोड दो ओर अपनी पढाई पर ध्यान दो" जह बात बोलकर सीरत वहां से अपने रास्ते चल पड़ी। विक्रम जह बात सुनकर हताश हो गया, उसे जह उम्मीद नहीं थी कि उसके साथ ऐसा होगा, पर अपनी उम्मीदों को जिन्दा रखने के लिए, जाती हुई आपने सपनो की परी को पीछे से आवाज लगाते हुए अपना हाथ उसकी तरफ बढाईया ओर छोटी सी हंसी के साथ बोला "कोई बात नहीं, लेकिन हम दोनों प्रेमी ना सही परंतु एक अच्छे दोस्त तो बन सकते हैं" सीरत ने बिना कुछ ज्यादा सोचते हुए उस दोस्ती के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया ओर प्यार से अपना हाथ एक नई  दोस्ती के लिए आगे कर दिया। विक्रम इस दोस्ती से बहुत खुश था, उसे लगा रहा था के आज दोस्ती हो गई है इसी तरह  धीरे-धीरे प्यार भी हो जाएगा। 
          अब दोनों नए नए दोस्त बने थे, तो वह काफी समय एक दूसरे के साथ बिताने लगे। एक दिन विक्रम मुँह लटका कर जलपान गृह मे बैठा हुआ था, उसी समय सीरत वहां आ गई।  जब सीरत ने उसे पूछा के उसकी उदासी की क्या बजह तो विक्रम बोला कि "एक साथ 5 छुट्टियां मैं घर पर अकेला कैसे गुजारू गा, बिना तुमसे मिले या बात किये"  जह बात सुनकर सीरत ने विक्रम से इस का कोई हल पुछा तो विक्रम ने हल बताया कि सीरत अपने मोबाइल फोन का नंबर  उसे दे देय ताकि वह दोनों एक-दूसरे से बात कर सके। सीरत ने बिना किंतु परंतु किये बिना उसकी खुशी के लिए आपने मोबाइल फोन का नंबर विक्रम को दे दिया,  मोबाइल फोन का नंबर लेने के बाद विक्रम का चेहरा खिल उठा। अब दोनों में कहीं सारी बातें मोबाइल फोन पर होने लगी, कभी कॉलिंग के जरिए तो कभी व्हाट्सएप मैसेंजर पर। धीरे-धीरे दोनों फेसबुक ओर इंस्टाग्राम जेसै सामाजिक संचार माध्यमों से भी जुड़ने लगे। जह बात का पता जब विक्रम के दोस्त आकाश को पता चला तो उसने एक दिन सभी दोस्तों के बीच विक्रम से "उसके ओर सीरत में क्या रिश्ता है? पुछा लिया। विक्रम ने सभी दोस्तों को झूठ बताया कि सीरत ओर वह आपस में प्रेमी हैं। देखते ही देखते यह बात पूरी क्लास को पता चल गई, ओर जब सीरत को यह पता चला तो वह सीधा विक्रम के  पाल गई। इस बात पर दोनों का आपस में बहुत ज्यादा झगड़ा हुआ, ओर सीरत ने दोस्ती का रिश्ता भी तोड़ दिया।  
       विक्रम ओर सीरत में दूरियां बढने लगीं, विक्रम के लाख बार माफी मांगने के बाद भी सीरत ने उसे माफ नहीं किया । 
क्या होगा अब इन दोनों का, यह तो बस सिर्फ बेपरवाह मुसाफिर  यानि की मैं इस कहानी का लेखक ही जानता हूँ, अगर आप भी जानना चाहते हैं तो इंतजार  करे।  तब तक इस कहानी को Share करे post पर comments करे ओर हा इस website पर visit करते रहे। मैं आप सबका प्यारा :-
                            - - - बेपरवाह मुसाफिर - - -                                                                 

Comments

  1. Wonderful, incredible, far from imagined, a heart touching story overall.

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  7. आपका लेख अच्छा लगा। मुझें यह पसंद है।

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