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Showing posts from July, 2019

Do Lamhe Zindagi gi Ke| दौ लम्हे जिंदगी के

                   दौ लम्हे जिंदगी के 
दिन गुज़रा और शाम का वो पल आ गया जिसका मुझे इन्तजार रहता है। यही तो वो दौ पल हैं, जो जिन्दगी में अहम है। दिन भर की सारी थकान भुल जाता हूं। मानों जैसे इन दौ पलों में दिन के 24 घंटे हो, जैसे सदियो से इन दौ पलों को जीय रहा हूं, जैसे सूखी मिट्टी श्रवण की पहली बारिश के इन्तजार में हो। घर का सारा काम खत्म करके मैं एकदम तरोताजा हो कर, सिटी पार्क की और चल पड़ा। आसमान में हल्के से बादल अपने उपर सफेद रंग की चादर उड़े हुए, सूरज को ढकने की कोशिश कर रहे हो। मैं जल्दी से जल्दी पार्क की ओर जाने के लिए उत्साहित था। चेहरे पर हल्की सी मुस्कान के साथ दिल ही दिल में सोच रहा था के आज की मुलाकात में मैं नंदनी से क्या क्या बातें करूंगा।  माफ़ कीजियेगा मैं बताना भुल गया, मैं हर रोज़ शाम को पार्क नंदनी से मिलने जाता हूं, नंदनी और मैं एक दुसरे से एक साल पहले जाॅब-इंटरव्यू में मिलें थे। पहली नज़र में ही हमें, वो हिन्दी फिल्मों वाला प्यार हो गया, नौकरी तो नहीं मिली हम दोनों को पर एक दुसरे का दिल जरूर मिल गया था।  पार्क में पहुंचा तो देखा हर उम्र के बच्चे खेल रहे थे, कुछ बुजु…